आर टी आई कानून की खुलेआम अवहेलना ऊनाआबकारी विभाग की चुप्पी, पारदर्शिता पर सवाल
- By Gaurav --
- Saturday, 17 Jan, 2026
RTI Law Shop The Unakari Department's Styles, Questions on Friends
आवंटन जैसे करोड़ों रुपये के सरकारी कारोबार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 ऊना में मज़ाक बनता नजर आ रहा है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ऊना ने आरटीआई के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी देने से लगातार परहेज कर कानून की खुली अवहेलना की है।
जन सूचना अधिकारी, कार्यालय उपायुक्त राज्य कर एवं आबकारी विभाग ऊना को 15 सितंबर 2025 को आरटीआई आवेदन देकर यह जानकारी मांगी गई थी
कि शराब ठेकों के लिए किन-किन व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया,
उनके पूरे नाम-पते क्या हैं, किन रेट्स पर ठेके आवंटित किए गए साथ ही इससे संबंधित पूरा रिकॉर्ड भी मांगा गया था।
आरटीआई अधिनियम की धारा 7(1) के अनुसार 30 दिनों के भीतर पूरी सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन विभाग ने इस कानूनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए 25 अक्टूबर 2025 को केवल अधूरी और गोलमोल जानकारी देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद 29 नवंबर 2025 को दोबारा लिखित रूप से संपूर्ण सूचना मांगी गई, मगर विभाग ने समय मांगने के बाद भी अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि RTI आर टी आई अधिनियम की धारा 20 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें जन सूचना अधिकारी पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है। सवाल यह भी उठता है कि यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ है, तो विभाग को रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से डर क्यों लग रहा है? आवंटन राज्य सरकार के राजस्व का बड़ा स्रोत होता है। आवंटन की प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में आ जाए, तो यह सीधे-सीधे शासन की नीयत और व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अधूरी जानकारी देकर यह संदेह और गहराता जा रहा है कि कहीं नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा तो नहीं पहुंचाया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सूचना के अधिकार जैसे मजबूत कानून को भी विभागीय अधिकारी हल्के में ले रहे हैं, तो आम नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आखिर जाए तो जाए कहां? यदि जल्द ही पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, तो यह मामला राज्य सूचना आयोग और न्यायालय तक जाने से इंकार नहीं किया जा सकता।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आबकारी विभाग कब तक चुप्पी साधे रखेगा, या फिर कानून के दायरे में आकर शराब ठेकों के आवंटन से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करेगा।
कार्यालय उपायुक्त राज्यकर व आबकारी ऊना के अधिकारी ना तो फोन पिक करते हैं , ना ही व्हाट्सएप पर मैसेज का जवाब देते हैं और ऑफिस में मिलने जाओ तो मना कर देते है कि बिजी है ।